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Scene 2 (3s)

कोरोना पर जीत

एक तमस भरी निशा जो बेहद संजीदगी से  गुजर रही है हमारे - तुम्हारे और भी ना जाने  कंहा- कंहा से मध्यम से मध्यमतर होते - होते  यह काली , भुजंग , सुरसा सी लंबी रात जिसे नाम दे दिया हमलोगो ने कोरोना का  सभी को रोते- बिलखाते एंठन के साथ गुजर रही है  किन्तु हाय रे कोरोना डायन क्या तुझे यह पता नहीं ?  हर भयानक से भयाक्रांत रात की भी होती है एक सुबह  तु भी जायेगी हार एक दिन  और आ जाएगा एक नया उजियारा ,नया भोर

Scene 3 (47s)

तु डाकिनी है तो क्या  प्रभु के बन्धुओ का तु नहीं कर सकती किनारा  निगल रही है ना तु  प्रतिदिन मानव का निवाला पर इसमें तेरी जीत नहीं  छुप- छुप कर जो तु कर रही है ना वार  देख लेना जल्द ही खत्म होगा  तेरा ये घिनौना व्यापार  होकर रह जाएगी तब तु निकम्मी- लाचार  ये जो मानव हैं ना , प्रभु का प्रासाद है  तेरे जैसे छल - प्रपंच के देन नहीं  ना ले और इम्तिहान मानव के सब्र का  और ना कम आंक इनके हिम्मत का

Scene 4 (1m 27s)

बहुत जल्द करने वालें हैं ये तेरा काम- तमाम  और बहुत जल्द तु भागने वाली है यंहा से  उठा कर अपना  ताम- ओ - झाम  जीतेंगे हम , जीतेगी मानवता , जीतेगा इँसानियत  कोरोना पर दर्ज करा कर अपनी जीत  मानव जग विहंसेगा  यह धरा फिर इठलायेगी , लहरायेगी , गुनगुनाएगी  नव गीत,  नव राग के साथ नव सृजन का संचार करेगी

Scene 5 (1m 56s)

कोरोना जाएगा हार , ये विश्वास , पक्का विश्वास ,दृढ़ विश्वास के साथ जन - जन , कण - कण , कोटि - कोटि  नवातुर के साथ कर रहा आगाज है